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...मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा! यूजीसी के नए नियम पर कुमार विश्वास का पहला रिएक्शन, जानें क्या हैं नए नियम और क्यों में मचा है घमासान

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नई दिल्ली। देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर हंगामा मचा हुआ है। यूजीसी के नियमों के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। ऐसे में अब भारत के प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास भी यूजीसी के विरोध में उतर आए हैं। नए नियमों को लेकर यूपी में भी खासा रोष देखने को मिल रहा है। हालात ये हैं कि प्रशासनिक अधिकारी भी इसके विरोध में उतर आए हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद देर रात तक खासा हंगामा देखने को मिला। हांलाकि रात में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। अब अलंकार अग्निहोत्री ने कलक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इधर इस मामले में अब प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने तीखी टिप्पणी की है। कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट किया और स्व. रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट की। पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा।’ इन चार पंक्तियों के साथ ही कुमार विश्वास ने यूजीसी रोलबैक लिखते हुए अपना फोटो शेयर किया है। कुमार विश्वास की पोस्ट पर यूजर्स ने कई कमेंट किए हैं।

क्या है यूजीसी का नियम? विरोध करने वालों की मांग?
दरअसल यूजीसी एक्ट बनाने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। रोहित वेमुला केस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भ्पहीमत म्कनबंजपवदंस प्देजपजनजमे में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए नियम-कानून बनाने को कहा। इसके बाद यूजीसी ने नियमों में बदलाव किया। सभी यूनीवर्सिटीज और कॉलेज में समता कमेटी बनाना कंपलसरी कर दिया। इस कमेटी के सामने कोई भी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के स्टूडेंट जातिगत भेदभाव के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। एससी, एसटी वर्ग के छात्र तो पहले भी जाति के आधार पर भेदभाव की शिकायत कर सकते थे, लेकिन अब इसमें ओबीसी वर्ग के स्टूडेंट्स को भी जोड़ दिया गया। कमेटी में एससी, एसटी और ओबीसी का प्रतिनिधि रखना जरूरी है लेकिन सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि हो ये जरूरी नहीं हैं। इसको लेकर विरोध है। सवर्णों की नाराजगी की दूसरी वजह ये है कि अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ क्या एक्शन होगा, इसका कोई प्रोविजन नए नियमों में नहीं हैं जबकि पहले ऐसा प्रोविजन था जिसे यूजीसी ने खत्म कर दिया। इसलिए जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं कि उनका कहना है कि यूसीजी ये मान कर के चल रहा है कि सवर्ण स्टूडेंट अत्याचारी होते हैं बाकी सारे पीड़ित। यूजीसी के एक्ट का विरोध करने वाले लोगों की मांग है कि भेदभाव किसी के भी खिलाफ हो उस पर एक्शन होना चाहिए। सवर्णों को भी सुदामा कोटा, भिखारी कहने वालों पर कार्रवाई हो। साथ ही अगर कोई झूठी शिकायत करता है, तो उसके लिए भी सजा का प्रोविजन हो।