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रुद्रपुर का ट्रांजिट कैंप बना अपराधियों का पनाहगाह? राजनीतिक संरक्षण के साए में फल-फूल रहा नशा और जुआ कारोबार

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रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर का रुद्रपुर जो औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों के लिए जाना जाता था, अब बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। रुद्रपुर में सिडकुल की स्थापना के बाद जहां एक ओर उद्योगों का विस्तार हुआ, वहीं दूसरी ओर बाहरी राज्यों से आए कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने भी यहां डेरा जमा लिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय के साथ रुद्रपुर अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हत्या, लूट, नशा तस्करी, जुआ और अवैध वसूली जैसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई मामलों में राजनीतिक संरक्षण की चर्चा भी खुलकर सामने आ रही है। आरोप है कि कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग विभिन्न राजनीतिक दलों में पदाधिकारी बनकर न केवल अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं,बल्कि अपराधियों को भी संरक्षण दे रहे हैं। हाल ही में ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र में सामने आए एक मामले ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि बाहरी क्षेत्र से आए कुछ लोग यहां नशा तस्करी और जुए के अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। इसके चलते थाना और चौकियों में इन लोगों की पकड़ मजबूत बताई जा रही है, जिससे कार्रवाई प्रभावित होती है।

जानकारी के मुताबिक ट्रांजिट कैंप के कृष्णा कॉलोनी में नानकमत्ता से आया एक संदिग्ध व्यक्ति लंबे समय से सक्रिय है। आरोप है कि उसने रुद्रपुर को अपना ठिकाना बना लिया है और राजनीतिक संरक्षण के बल पर नशा और जुए के नेटवर्क को संचालित कर रहा है। चर्चा यह भी है कि “सेटिंग” के नाम पर मोटी रकम का लेन-देन होता है, जिससे अवैध कारोबार निर्बाध रूप से चलता रहता है। हालांकि पुलिस प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है और कई अभियुक्तों को गिरफ्तार भी किया गया है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक राजनीतिक संरक्षण की जांच नहीं होगी, तब तक अपराध पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल होगा। लोगों का मानना है कि अपराध और राजनीति का गठजोड़ शहर की शांति और विकास के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। औद्योगिक शहरों में बाहरी आबादी के बढ़ने के साथ अपराध की आशंका भी बढ़ती है, लेकिन यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें तो हालात काबू में रखे जा सकते हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की पड़ताल की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शहर की साख और आमजन की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए प्रशासन को ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे, ताकि रुद्रपुर फिर से उद्योग और विकास के लिए पहचाना जाए, न कि अपराध की बढ़ती छाया के लिए।