ऊधम सिंह नगर में बंगाली समाज की महारैली को लेकर सरगर्मियां तेज:युवा नेता हरिदास मंडल ने झोंकी ताकत,क्षेत्र में लगाई चौपालें

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रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर की माटी में इस समय एक अनूठी सामाजिक और राजनीतिक चेतना की बयार बह रही है। वर्षों से अपने मौलिक अधिकारों, पहचान और वजूद की लड़ाई लड़ रहा बंगाली समाज अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 20 सितंबर को जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाली विशाल महारैली और कलेक्ट्रेट कूच केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बंगाली समाज के स्वाभिमान और भविष्य की दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक आंदोलन बनने जा रहा है। इस महाआंदोलन की सबसे खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर यह है कि समाज के बुजुर्गों के मार्गदर्शन के साथ-साथ अब युवा वर्ग ने भी संघर्ष की कमान अपने हाथों में ले ली है। दिनेशपुर के चर्चित, ऊर्जावान और समर्पित युवा नेता हरिदास मंडल इस पूरे आंदोलन के केंद्र बिंदु और जन-नायक के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

ऊधम सिंह नगर में बंगाली समाज की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर प्रस्तावित 20 सितंबर की महारैली से पहले आंदोलन की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रुद्रपुर के रामलीला मैदान से जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रस्तावित कलेक्ट्रेट कूच को लेकर बंगाली कल्याण समिति उत्तराखंड की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। इसी बीच दिनेशपुर क्षेत्र के युवा नेता हरिदास मंडल लगातार जनसंपर्क अभियान में जुटे हुए हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चौपालें और बैठकें कर वह समाज के लोगों तक महारैली की जानकारी पहुंचा रहे हैं और 20 सितंबर को रुद्रपुर पहुंचने की अपील कर रहे हैं। हरिदास मंडल की सक्रियता इस पूरे अभियान में चर्चा का विषय बनी हुई है। समिति की ओर से उन्हें जनसंपर्क के साथ-साथ अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी और वाहनों की व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। मंडल इन जिम्मेदारियों को लेकर लगातार क्षेत्र में लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। खास तौर पर युवाओं से संवाद कर उन्हें आंदोलन के मुद्दों और महारैली के उद्देश्य की जानकारी दी जा रही है। आपको बता दें बंगाली कल्याण समिति की ओर से चार प्रमुख मांगों को लेकर 10 दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया है। समिति के अनुसार पहली मांग विस्थापित बंगाली समाज की संबंधित जातियों को उत्तराखंड में अनुसूचित जाति का अधिकार दिलाने की है। दूसरी मांग प्राथमिक शिक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक बांग्ला भाषा में शिक्षा की व्यवस्था से जुड़ी है। तीसरी मांग शक्तिफार्म समेत अन्य पुनर्वासित क्षेत्रों में लंबित भूमिधरी अधिकार देने की है, जबकि चौथी मांग करीब आठ वर्षों से बंद छात्रवृत्ति और सहायता योजनाओं को दोबारा शुरू करने की है। इन मांगों को लेकर समिति 20 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकालने की तैयारी कर रही है। इन मुद्दों को लेकर हरिदास मंडल चौपालों में लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। उनका फोकस यह बताने पर है कि आंदोलन केवल किसी एक वर्ग या क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा, भूमि अधिकार, सामाजिक अधिकार और छात्र हितों से जुड़े सवालों को लेकर है। दिनेशपुर और आसपास के बंगाली बहुल क्षेत्रों में उनका लगातार जनसंपर्क अभियान महारैली की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। समिति के अनुसार आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। 20 सितंबर को रामलीला मैदान से शुरू होने वाली रैली जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचेगी, जहां समाज की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी है। समिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसका आंदोलन किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विरोध के बजाय लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से है। ऐसे में 20 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर बंगाली कल्याण समिति आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने में जुटी है, तो दूसरी ओर हरिदास मंडल जैसे स्थानीय कार्यकर्ताओं और युवा चेहरों की सक्रियता जनसंपर्क को गति दे रही है। अब देखना यह होगा कि महारैली में कितनी भागीदारी होती है और प्रशासन व सरकार की ओर से इन चार मांगों पर आगे क्या कदम उठाया जाता है।