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सुरक्षा का अभेद्य चक्र: पाक गैंगस्टर शहजाद भट्टी के इनपुट से उत्तराखंड में हाई अलर्ट, चीन-नेपाल सीमा से लेकर सोशल मीडिया पर कड़ा पहरा

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देहरादून। पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और राज्य में शांति भंग करने के संदिग्ध इनपुट के बाद उत्तराखंड पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने उच्च स्तरीय बैठक कर आतंकवाद नियंत्रण, सीमावर्ती सुरक्षा और आगामी बड़े आयोजनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की। इस दौरान प्रदेश भर में 24 घंटे सतर्कता बरतने के साथ-साथ राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी नीति 'प्रहार' को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया इनपुट के बाद उत्तराखंड पुलिस ने सुरक्षा तंत्र को और सक्रिय कर दिया है। आतंकवाद नियंत्रण, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और आगामी विधानसभा चुनाव के साथ चारधाम यात्रा, कुंभ मेला और प्रमुख धार्मिक आयोजनों को देखते हुए पुलिस ने बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने अभिसूचना एवं सुरक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को हर स्तर पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में विशेष रूप से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कथित तौर पर कट्टर बनाने से जुड़े इनपुट पर चर्चा हुई। पुलिस के अनुसार शहजाद भट्टी और उसके साथियों से संबंधित गतिविधियों को देखते हुए सभी जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। साथ ही आतंकवाद की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य एटीएस की कार्यप्रणाली को और पेशेवर बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए देश के बड़े राज्यों की कार्यप्रणाली और सफल अभियानों का अध्ययन कर उपयोगी मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड की चीन और नेपाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर भी पुलिस ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। सीमावर्ती जिलों में संदिग्ध गतिविधियों, घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी तत्वों की आवाजाही पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आईटीबीपी, एसएसबी, सेना, आईबी, राज्य पुलिस और एटीएस के बीच उच्चस्तरीय इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वय को मजबूत करना है, ताकि सीमा से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर मिलने वाले इनपुट पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा बैठक में प्रमुख विषयों में शामिल रही। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही विशिष्ट महानुभावों के प्रस्तावित कार्यक्रमों को देखते हुए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम पहले से मजबूत करने को कहा गया है। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने तथा आगामी कुंभ मेले और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए ठोस सुरक्षा कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया। राज्य स्थापना दिवस, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे पर्वों को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था में सोशल मीडिया को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर 24 घंटे सघन निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का उद्देश्य भड़काऊ सामग्री अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों को समय रहते चिन्हित करना है। संवेदनशील और सांप्रदायिक मामलों से जुड़ी भ्रामक खबरों, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, डीपफेक और अफवाहों पर भी तत्काल आधिकारिक फैक्ट-चेक और खंडन जारी करने को कहा गया है। डीजीपी दीपम सेठ ने महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए आवश्यक जनशक्ति, तकनीकी उपकरण और अन्य संसाधनों की व्यवस्था समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखंड पुलिस को प्रदान किए गए प्रेसिडेंट पुलिस कलर समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। पुलिस की यह समीक्षा बैठक आगामी महीनों में उत्तराखंड के सामने मौजूद कई सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर समन्वित तैयारी पर केंद्रित रही। आतंकवाद संबंधी इनपुट से लेकर सीमा सुरक्षा, चुनाव, धार्मिक आयोजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सुरक्षा तंत्र को सक्रिय रखने की रणनीति पर जोर दिया गया है।