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पीएनजी के उपयोग के माध्यम से एलपीजी आयात निर्भरता कम होने से 2026 में भारतीय राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा की बचत कैसे होगी

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देहरादून। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस और ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत सरकार ने घरेलू 
एलपीजी सिलेंडर पर बोझ कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार भी तेजी से काम कर रही है। खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि अप्रैल महीने तक प्रदेश के डेढ़ लाख घरों तक पीएनजी कनेक्शन पहुंचा दिए जाएंगे। प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन विस्तार का कार्य पांच प्रमुख कंपनियां कर रही हैं। इनमें गेल गैस लिमिटेड (एचएनजीपीएल), आईओएजीपीएल, एचपीसीएल और गैसोनेट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। शासन ने इन सभी कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने और पीएनजी कनेक्शन देने की अनुमति दे दी है। भारत सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि देश में उत्पादित 30-35 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का अधिकतम उपयोग घरेलू स्तर पर किया जाए, ताकि एलपीजी आयात पर निर्भरता कम हो सके।

सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि जहां बड़ी संख्या में घर हैं, वहां सामान्य पाइपलाइन बिछाई जा रही है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों और चारधाम यात्रा मार्गों पर क्लस्टर आधारित पीएनजी कनेक्शन दिए जाएंगे। इससे पाइपलाइन बिछाने की लागत कम होगी और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी सुविधा पहुंच सकेगी।सरकार ने कंपनियों के साथ दो दौर की बैठकें की हैं। इन बैठकों में कंपनियों की समस्याओं को सुनकर अधिकांश अड़चनों को दूर कर दिया गया है। वर्तमान में कई इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन कनेक्शन एक्टिव नहीं हो पा रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में कनेक्शन की मांग नहीं आने के कारण कुछ जगहों पर सप्लाई शुरू नहीं की गई है। सचिव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन क्षेत्रों में घर-घर कनेक्शन देना शुरू कर दिया जाएगा। पीएनजी विस्तार में दो बड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। पहली समस्या यह है कि कई जगहों पर पाइपलाइन बिछ जाने के बावजूद गैस सप्लाई नहीं हो पा रही है। दूसरी और गंभीर समस्या सड़कों पर गड्ढा करने को लेकर है। कंपनियां चाहती थीं कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़क खोदने पर गड्ढा भरने का खर्च संबंधित विभाग (पीडब्ल्यूडी या नगर निगम) वहन करे। सरकार ने इस मांग को साफ अस्वीकार कर दिया है। सचिव आनंद स्वरूप ने कहा, “उत्तराखंड इतना अमीर राज्य नहीं है कि कंपनियों द्वारा खोदी गई सड़कों को भरने का खर्च वहन कर सके। कंपनियों को खुद गड्ढा भरने या इसके लिए धनराशि जमा करनी होगी।” इस सख्त रुख के कारण पाइपलाइन बिछाने का कार्य कुछ स्थानों पर प्रभावित हुआ है।

खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य पूरा करें। अप्रैल तक डेढ़ लाख कनेक्शन देने का लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी है। यदि यह लक्ष्य हासिल हो गया तो उत्तराखंड पीएनजी विस्तार में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा। पीएनजी कनेक्शन के कई फायदे हैं। यह एलपीजी सिलेंडर से सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल है। इसमें रिसाव का खतरा कम होता है और घरों में गैस पहुंचाने के लिए बुकिंग या डिलीवरी की चिंता नहीं रहती। विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह सुविधा महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाई सबसे बड़ी चुनौती है। वहां सड़कें संकरी हैं, भूस्खलन का खतरा रहता है और पाइपलाइन बिछाने में तकनीकी दिक्कतें आती हैं। सरकार क्लस्टर मॉडल अपनाकर इन समस्याओं का समाधान करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, कंपनियों को भी स्थानीय लोगों को जागरूक करने और कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। कई जगहों पर लोग अभी भी पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर पर ही भरोसा कर रहे हैं। सरकार और कंपनियां मिलकर जागरूकता अभियान चला रही हैं। यदि अप्रैल तक डेढ़ लाख कनेक्शन का लक्ष्य पूरा हो जाता है तो सरकार अगले चरण में और अधिक क्षेत्रों को कवर करने की योजना बना रही है। विशेषकर चारधाम यात्रा मार्ग, पर्यटन क्षेत्र और नए विकसित कॉलोनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि पीएनजी के व्यापक विस्तार से न केवल एलपीजी पर सब्सिडी का बोझ कम होगा, बल्कि वायु प्रदूषण भी घटेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि सड़क खोदाई और गड्ढा भरने को लेकर कंपनियों के साथ अभी भी कुछ मतभेद बाकी हैं। यदि यह मुद्दा जल्द सुलझ गया तो लक्ष्य हासिल करने में कोई बड़ी बाधा नहीं रहेगी।