कैसे नैनीताल की खुशियों भरी यात्रा मेरठ परिवार के लिए त्रासदी बन गई

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नैनीताल। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताने और यादगार पल संजोने आए मेरठ के एक परिवार के लिए यह यात्रा जिंदगी का सबसे दर्दनाक अनुभव बन गई। नैनीताल घूमकर लौट रहे 29 लोगों से भरे टेंपो ट्रैवलर का ब्रेक फेल हो गया, जिसके बाद वाहन कालाढूंगी-नैनीताल मार्ग पर एक खतरनाक मोड़ के पास भीषण हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार मेरठ के इस्लामाबाद काला फैक्टरी क्षेत्र के रहने वाले कई रिश्तेदार परिवार एक साथ नैनीताल घूमने आए थे। सभी ने दिनभर नैनीताल की वादियों का आनंद लिया, नौकायन किया और पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। शाम को सभी लोग एक टेंपो ट्रैवलर में सवार होकर वापस मेरठ लौट रहे थे। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर कुछ ही देर में दर्दनाक त्रासदी में बदल जाएगा। घायल चालक नईम ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि कालाढूंगी पहुंचने से पहले अचानक वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। जैसे ही उसे ब्रेक फेल होने का अहसास हुआ, उसने वाहन को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन ढलान वाले मार्ग पर वाहन की गति लगातार बढ़ती चली गई। गाड़ी में बैठे 29 यात्रियों को जब स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ तो उनकी सांसें थम गईं। कई लोग दुआएं मांगने लगे तो कुछ बच्चे और महिलाएं डर के कारण रोने लगीं। चालक ने वाहन को रोकने के लिए आखिरी कोशिश करते हुए प्रिया बैंड के पास उसे डिवाइडर से टकरा दिया, लेकिन तेज रफ्तार के कारण डिवाइडर टूट गया और वाहन आगे बढ़कर एक पेड़ से जा टकराया।

परिजनों के सामने खाई में गिर गईं दो महिलाएं
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के भीतर बैठे यात्री आगे की ओर उछल गए। जोरदार झटके से वाहन का शीशा टूट गया। इसी दौरान पीछे बैठी नाज़मीन और फरद बेगम संतुलन खो बैठीं और सीधे सड़क किनारे मौजूद गहरी खाई में जा गिरीं। बताया गया कि वाहन में मौजूद अन्य परिजनों ने दोनों महिलाओं को बचाने के लिए उनका हाथ पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें संभालने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते दोनों महिलाएं गहरी खाई में समा गईं। यह दृश्य उनके परिजनों की आंखों के सामने घटा, जिसे याद कर परिवार के सदस्य अब भी सदमे में हैं।

स्थानीय लोगों ने दिखाई मानवता, तुरंत शुरू किया रेस्क्यू
हादसे की सूचना मिलते ही धमोला गांव निवासी अजय और जैक्सन सबसे पहले स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर भयावह स्थिति थी। चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। महिलाएं और बच्चे दहशत में थे और कई लोग वाहन के अंदर फंसे हुए थे। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। कुछ ही देर में पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से वाहन में फंसे 27 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल थे। मानवता की मिसाल पेश करते हुए अजय और जैक्सन ने अपने निजी वाहन से कई घायलों को तत्काल सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया। अन्य घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल लाया गया। समय रहते राहत कार्य शुरू होने के कारण कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

एसटीएच में हाई अलर्ट, 21 घायल भर्ती
हादसे की गंभीरता को देखते हुए सुशीला तिवारी अस्पताल प्रशासन को तत्काल हाई अलर्ट पर रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने आनन.फानन में बेड खाली करवाए और डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ की अतिरिक्त टीमों को तैनात किया। एसटीएच के चिकित्सक डॉ. दीपक जोशी के अनुसार अस्पताल में कुल 21 घायलों को भर्ती कराया गया है। इनमें 9 महिलाएं, 10 पुरुष और 2 बच्चे शामिल हैं। कई घायलों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं और उनका सीटी स्कैन कराया गया है। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है और कई की हालत गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा छह घायलों का उपचार कालाढूंगी के स्थानीय अस्पताल में किया जा रहा है।

अस्पताल में गूंजती रहीं चीखें और दुआएं
हादसे के बाद अस्पताल का माहौल बेहद भावुक और दर्दनाक हो गया। घायल यात्रियों के परिजन अस्पताल पहुंचते रहे। कोई अपने बच्चों को सीने से लगाकर रो रहा था तो कोई अपनों की सलामती के लिए डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों से गुहार लगा रहा था। पूरा अस्पताल परिसर परिजनों की चिंता, दर्द और प्रार्थनाओं का गवाह बना रहा। एक ओर डॉक्टर घायलों को बचाने में जुटे थे तो दूसरी ओर परिवार के लोग इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे थे।