नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान एक प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। मनगवां निवासी कल्पना मिश्रा और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में कथित लापरवाही और नर्सिंग स्टाफ पर अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। मामले ने तूल पकड़ा तो मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित कर दिया। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की गई है। बताया गया कि रीवा बैकुण्ठपुर निवासी कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए गांधी स्मारक चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, उपचार के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने समय पर उचित उपचार नहीं दिया। उनका कहना है कि प्रसूता की हालत बिगड़ने के बावजूद कथित तौर पर समय रहते आवश्यक चिकित्सकीय कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ पर परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने के भी आरोप लगाए गए। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में स्वजन के पहुंचने से अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
मामले के बीच प्रसूता का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह रोते हुए मदद की गुहार लगाती सुनाई दे रही है। वह रोते हुए कह रही थी कि ऐ बाबू, हमको बचा लो... ये हमको मार डालेंगे। वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। परिजनों के विरोध और मामले की गंभीरता को देखते हुए श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन ने दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित कर दिया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति को घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट कमिश्नर, चिकित्सा शिक्षा एवं लोक स्वास्थ्य तथा एमडी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की भूमिका समेत अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।

