देहरादून। उत्तराखंड में राशन कार्डों के सत्यापन के लिए चलाया जा रहा ई-केवाईसी अभियान बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि तय समय सीमा को दो बार बढ़ाने के बावजूद अभी तक लगभग 20 प्रतिशत राशन कार्डों की ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाई है। इस कारण हजारों पात्र लाभार्थियों पर सरकारी सस्ते राशन से वंचित होने का खतरा मंडराने लगा है।
भारत सरकार के निर्देशों के तहत खाद्य आपूर्ति योजनाओं में धांधली, डुप्लीकेसी और फर्जीवाड़े को रोकने के उद्देश्य से प्रदेशभर में राशन कार्डों का डिजिटल सत्यापन यानी ई-केवाईसी अभियान शुरू किया गया था। इस प्रक्रिया में लाभार्थियों की पहचान बायोमेट्रिक अथवा आंख की रेटिना स्कैन के माध्यम से सुनिश्चित की जानी थी, ताकि केवल वास्तविक पात्र लाभार्थियों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और उनका विवरण डिजिटल डाटा में दर्ज हो। हालांकि, अभियान की रफ्तार बेहद सुस्त रही। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या, तकनीकी संसाधनों की कमी और स्टाफ की सीमित उपलब्धता के चलते यह कार्य अभी तक केवल 80 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। ई-केवाईसी की अंतिम समय सीमा पहले बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 की गई थी, लेकिन वर्ष 2026 का जनवरी महीना भी समाप्त हो चुका है और अब भी कई जिलों में सत्यापन अधूरा है। ई-केवाईसी को लेकर लगातार मिल रही नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रदेश की खाद्य मंत्री रेखा आर्य ने स्पष्ट किया है कि जो लाभार्थी किसी कारणवश ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं, उनके मामलों की जांच की जाएगी। यदि कोई पात्र व्यक्ति इसके बावजूद छूट जाता है, तो राज्य सरकार इस संबंध में भारत सरकार से अनुरोध करेगी। खाद्य मंत्री ने यह भी बताया कि गंभीर बीमारी, दिव्यांगता अथवा बायोमेट्रिक और रेटिना सत्यापन में तकनीकी समस्या वाले लाभार्थियों को पहले ही छूट दी जा चुकी है। सरकार का प्रयास है कि सभी पात्र लोगों को बिना बाधा के राशन मिलता रहे और कोई भी जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित न हो।

