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मतदाता सूची पुनरीक्षण: 1 महीने में आए 2.83 लाख दावे-आपत्तियां, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों संग की अहम बैठक

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उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत नाम जुड़वाने, कटवाने और संशोधन कराने की प्रक्रिया जोरों पर है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को सचिवालय में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने एसआईआर के तीसरे चरण के तहत गतिमान दावे-आपत्तियों की प्रगति साझा की और चुनावी नियमों की विस्तृत जानकारी दी।
 
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला तेज हो गया है। 14 जुलाई से 13 अगस्त तक एक माह में कुल 2,83,890 दावे एवं आपत्तियां विभिन्न माध्यमों से निर्वाचन विभाग को प्राप्त हुई हैं। बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों के बाद निर्वाचन विभाग ने इनके समयबद्ध निस्तारण की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर SIR के तीसरे चरण में चल रही दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में राजनीतिक दलों को निर्वाचन संबंधी नियमों और दावों-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच प्राप्त आवेदनों में फार्म-6 के करीब 1.28 लाख आवेदन मिले हैं। फार्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा फार्म-7 के करीब 1.07 लाख और फार्म-8 के लगभग 47 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। फार्म-7 और फार्म-8 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम हटाने, सुधार और अन्य आवश्यक संशोधन से जुड़े दावे-आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं। इतनी बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों को एसआईआर की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्वाचन विभाग अब इन आवेदनों को डिजिटल स्वरूप में दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटा है। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण के दौरान उनके बूथ लेवल एजेंट सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए राजनीतिक दलों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बताया गया कि वर्तमान में फार्म-6, 7 और 8 को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है। डिजिटाइजेशन के बाद प्राप्त आवेदनों की जांच और निस्तारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और मैनुअल ऑफ इलेक्टोरल रोल में दावे एवं आपत्तियों से संबंधित प्रावधानों की बिंदुवार जानकारी दी। उन्होंने प्रक्रिया के विभिन्न चरणों और निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानकारी भी साझा की। निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में शामिल होने वाले पात्र नागरिकों के नाम दर्ज हों और अपात्र या गलत प्रविष्टियों से संबंधित मामलों का नियमानुसार निस्तारण किया जा सके। बैठक के जरिए राजनीतिक दलों को भी इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया गया है।