हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार का नारायणी शिला मंदिर शनिवार को न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना, बल्कि देश की वर्तमान सियासत का गवाह भी बना। असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के मुखर नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में अपनी श्रद्धा का अर्घ्य अर्पित किया। पिछले 12 वर्षों से निरंतर आ रहे सीएम सरमा ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने परिवार व राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि यहाँ आकर उन्हें असीम आत्मिक और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।
हरिद्वार में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नारायणी शिला मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उनका राजनीतिक अंदाज भी देखने को मिला। सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विपक्षी नेताओं की मुलाकात को लेकर तंज कसा। वहीं, दिल्ली में विपक्षी दलों के आंदोलन को उन्होंने तमाशा करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह पिछले 12 वर्षों से लगातार यहां आकर पूजा करते रहे हैं। उनके अनुसार, मंदिर में पहुंचकर उन्हें असीम शांति की अनुभूति होती है। इस बार भी उन्होंने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और अपने परिवार तथा असम की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। धार्मिक यात्रा के दौरान सरमा ने मंदिर में दर्शन किए, लेकिन मीडिया से बातचीत में उनका ध्यान राष्ट्रीय राजनीति और विपक्ष के हालिया विरोध-प्रदर्शनों पर केंद्रित हो गया। राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विपक्षी नेताओं की मुलाकात के सवाल पर सरमा ने राहुल गांधी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पूरे देश के राष्ट्रपति हैं और उनसे कोई भी मिल सकता है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में भी प्रतिदिन हजारों लोग जाते हैं। उन्होंने इस मुलाकात को किसी असाधारण उपलब्धि के रूप में पेश करने पर सवाल उठाते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। सरमा ने कहा कि जब राहुल गांधी चंद्रयान और मंगलयान तक जाएंगे, तब उनसे पूछना कि उन्होंने कोई चमत्कार किया है। उनकी इस टिप्पणी को विपक्षी राजनीति पर तंज के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति और न्यायपालिका से मुलाकात के राजनीतिक महत्व को लेकर अलग-अलग दलों के अपने-अपने तर्क हैं। दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल लोगों से 100 गुना अधिक जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह आंदोलन के जरिए सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें उसे सफलता नहीं मिलेगी। सरमा ने कहा कि सरकार विपक्ष के आरोपों से डरने वाली नहीं है। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी स्थिति का उल्लेख करते हुए उपचुनावों में पार्टी की जीत का दावा भी किया। उनके मुताबिक, विपक्ष की ओर से सरकार पर बनाए जा रहे दबाव का कोई असर नहीं होने वाला। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और घेराबंदी को लेकर पूछे गए सवालों पर भी सरमा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचकर हंगामा और तमाशा करना चाहते हैं। हालांकि, ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और विपक्षी दलों के आंदोलन को लेकर उनका अपना आकलन हैं। बातचीत के दौरान सरमा ने एक संगठन को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उल्लेख करते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, उनके बारे में बात करने के बजाय खुद को युवा शक्ति बताने वालों पर चर्चा होनी चाहिए। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधने की कोशिश की। हरिद्वार में नारायणी शिला मंदिर के दर्शन के बाद हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों ने धार्मिक यात्रा को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया। एक ओर उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक शांति की बात कही, तो दूसरी ओर राहुल गांधी और विपक्षी आंदोलन पर तीखे बयान दिए। दिल्ली में विपक्ष का विरोध लोकतांत्रिक राजनीति और सरकार के प्रति असहमति से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है। वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से इन प्रदर्शनों की आलोचना की जा रही है। ऐसे में सरमा के बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि उनके इन बयानों पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

