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पितृ विसर्जन अमावस्या पर सीएम धामी ने किया पूर्वजों का तर्पण, बोले-हमारी जड़ों और संस्कारों के आधार हैं पूर्वज 

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में पितृ पक्ष के अंतिम दिवस यानी सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या का पावन पर्व पूरी श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आवास पर विधि-विधान से तर्पण कर अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

 पितृ पक्ष के अंतिम दिन पितृ विसर्जन अमावस्या के पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए तर्पण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके आशीर्वाद की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वज हमारी जड़ों, संस्कारों और जीवन-मूल्यों के आधार हैं। उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करना सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है। पितृ विसर्जन अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके योगदान को याद करने का यह विशेष अवसर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर पूर्वजों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें जीवन जीने की दिशा देने के साथ संस्कार और मूल्य भी प्रदान किए हैं। उनकी सीख और परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को मार्गदर्शन देती हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना हमारी सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों का स्मरण करना उनके योगदान को याद करने और परिवार की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर भी है। मुख्यमंत्री ने अपने पूर्वजों की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रार्थना की कि उनका स्नेह, पुण्य और आशीर्वाद सदैव सभी पर बना रहे। उन्होंने इस अवसर के माध्यम से पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को भी रेखांकित किया। पितृ पक्ष के अंतिम दिन देशभर में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। उत्तराखंड में भी हरिद्वार सहित अनेक तीर्थस्थलों और नदी घाटों पर श्रद्धालु तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से पितरों का स्मरण करते हैं। पितृ विसर्जन अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे परिवार की जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को याद करने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। पूर्वजों के अनुभव, त्याग और संस्कार आने वाली पीढ़ियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का संदेश इसी सांस्कृतिक परंपरा को रेखांकित करता है। पितृ पक्ष के समापन पर उन्होंने पूर्वजों को नमन करते हुए उनके आशीर्वाद की कामना की और श्रद्धा, कृतज्ञता तथा सम्मान को भारतीय जीवन-मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।