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एसआईआर विवाद पर धामी का विपक्ष पर हमला, बोले- हुड़दंगबाजी से नहीं चलता देश

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देहरादून।  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली के संसद मार्ग पर विपक्षी दलों द्वारा किए गए प्रदर्शन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने करारा हमला बोला है। मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष के विरोध को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि देश हुड़दंगबाजी, अराजकता और माहौल खराब करने से नहीं, बल्कि संविधान, विधि और कानून व्यवस्था के आधार पर ही चलेगा।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर देश की सियासत लगातार गरमाती जा रही है। विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन और निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश संविधान, कानून और व्यवस्था के आधार पर चलता है, हुड़दंगबाजी और माहौल खराब करने से नहीं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उनके मुताबिक, देश में इससे पहले भी कई बार मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया हो चुकी है, लेकिन उस समय इस तरह की आपत्ति नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि इस बार पहली बार जैसी गंभीरता और व्यापक स्तर पर एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अधिक विश्वसनीय बनाना है। विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चुनाव परिणामों को लेकर विपक्ष को आपत्ति है तो यह समझना होगा कि ज्ञानेश कुमार के कार्यभार संभालने से पहले भी भाजपा और एनडीए कई राज्यों में चुनाव जीतते रहे हैं। धामी ने कहा कि केवल चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाकर राजनीतिक सवालों का समाधान नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते हैं तो वह कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग और कभी प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल खड़े करता है। एसआईआर का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज है या कोई अवैध घुसपैठिया मतदाता सूची में शामिल है, तो क्या उसे मतदान का अधिकार मिलना चाहिए? धामी ने कहा कि गलत नामों को हटाने और मतदाता सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से प्रक्रिया चल रही है तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची के शुद्धिकरण से किसी को परेशानी हो रही है तो इससे उसकी मंशा पर सवाल उठते हैं। हालांकि, विपक्ष लगातार एसआईआर की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, नाम हटाए जाने और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाता रहा है। एसआईआर के मुद्दे पर मंगलवार को विपक्षी सांसद संसद भवन परिसर में एकत्र हुए और नारेबाजी के बाद निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को दूर करने के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी विपक्षी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रही। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के सेंट्रल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। उत्तराखंड में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। वहीं, भाजपा और सरकार इसे मतदाता सूची के शुद्धिकरण की जरूरी प्रक्रिया बता रही है। मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर व्यवस्था को बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने की राजनीति जनता के सामने है। धामी ने ईवीएम को लेकर विपक्ष के रुख पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब चुनाव में हार होती है तो ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन जब उसी ईवीएम से जीत मिलती है तो वह सही हो जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष को यह समझना होगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था संस्थाओं और कानून के आधार पर चलती है। चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और देश संविधान, विधि एवं व्यवस्था के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।