देहरादून। देश में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आगामी 8 और 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में दो दिवसीय 'राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन' का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में देशभर की महिला सुरक्षा, डिजिटल सेफ्टी, कार्यस्थल पर अनुकूल माहौल और बाल कल्याण से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर गहन मंथन होगा। सम्मेलन के समापन सत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे, जिनका मार्गदर्शन देश और विभिन्न राज्यों के लिए भविष्य की नीतियों को आकार देने में प्रेरणादायी साबित होगा।
महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर आगामी 8 और 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में देशभर के राज्यों की ओर से महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण, घरेलू हिंसा, डिजिटल सुरक्षा और महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने से जुड़े विषयों पर नीतिगत मंथन किया जाएगा। राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में सम्मेलन की रूपरेखा, राज्य की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले विषयों और उत्तराखंड में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी तरीके से रखने को लेकर बिंदुवार चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की योजनाओं और उपलब्धियों को तथ्यात्मक एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जाए। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और समग्र कल्याण को मजबूत करने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर कार्यप्रणाली और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। महिला सुरक्षा से जुड़े संबल और महिला सशक्तिकरण से संबंधित सामर्थ्य घटक सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगे। हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी सहायता, आश्रय, पुलिस सहायता और परामर्श जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी विचार-विमर्श होगा। इसके साथ ही 24 घंटे आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने तथा जरूरतमंद महिलाओं को संबंधित सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था पर राज्यों के अनुभव साझा किए जाएंगे। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिलाओं के लिए सुरक्षित और रोजगार-अनुकूल वातावरण तैयार करने पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा सखी निवास और पालना जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से कामकाजी महिलाओं की जरूरतों को पूरा करने तथा उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के मुद्दे भी सम्मेलन के एजेंडे में रहेंगे। बैठक में मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि नई दिल्ली में होने वाला राष्ट्रीय सम्मेलन महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के साथ आंगनवाड़ी व्यवस्था, पोषण और बाल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों की ओर से किए जा रहे बेहतर कार्यों और उनके अनुभवों को साझा करने से योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार का रास्ता खुलेगा। इससे राज्यों को एक-दूसरे की सफल कार्यप्रणाली को समझने और अपने यहां उसे बेहतर तरीके से लागू करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन उत्तराखंड के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने के साथ ही दूसरे राज्यों की उत्कृष्ट पहल और योजनाओं को समझने का मौका मिलेगा। इससे उत्तराखंड में महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। मंत्री ने बताया कि सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और महत्वपूर्ण सुझाव भी प्राप्त होंगे। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इस तरह के सम्मेलन राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने के साथ महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा देने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। उत्तराखंड सरकार की ओर से सम्मेलन में राज्य की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। खास तौर पर महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण, पोषण, आंगनवाड़ी व्यवस्था और बाल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर साझा किया जाएगा।

