भारत-चीन व्यापार के सुचारू निष्पादन के लिए गुंजी बेस कैंप में स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं बढ़ाई गईं

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पिथौरागढ़। सीमांत उत्तराखंड के लिए बड़ी खबर है। करीब सात साल के अंतराल के बाद लिपुलेख दर्रा से भारत-चीन के बीच पारंपरिक व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। व्यापार के आगामी 1 जून से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। कोरोना महामारी के बाद वर्ष 2020 से यह व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था। इससे पहले वर्ष 2019 में आखिरी बार सीमांत क्षेत्र के व्यापारी तिब्बत की प्रमुख मंडी तकलाकोट तक पहुंचे थे। अब दोनों देशों के बीच वार्ता के बाद व्यापार बहाली का रास्ता साफ हुआ है, जिससे सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में उत्साह है।

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला लिपुलेख दर्रा ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इस मार्ग से व्यापार बंद हो गया था, जिसे वर्ष 1991 में फिर से शुरू किया गया। हालांकि, कोरोना काल में न केवल व्यापार बल्कि कैलास मानसरोवर यात्रा भी स्थगित हो गई थी। वर्ष 2025 में यात्रा तो पुनः शुरू हो गई, लेकिन व्यापार को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। अब केंद्र सरकार के निर्देश मिलने के बाद पिथौरागढ़ जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कस्टम, आईटीबीपी, पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भारतीय व्यापारियों की सूची जल्द केंद्र को भेजी जाएगी। पिछली बार वर्ष 2019 में कुल 265 व्यापारियों को परमिट जारी किए गए थे, जिनके माध्यम से लगभग 3.15 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। इसमें भारतीय व्यापारियों ने 1.9 करोड़ रुपये का सामान आयात किया, जबकि 1.25 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। इस बार व्यापारियों की संख्या बढ़कर करीब 300 तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली के अनुसार भारतीय व्यापारी गुड़, मिश्री, सुर्ती, कॉस्मेटिक सामग्री और बर्तन जैसे उत्पाद लेकर तकलाकोट जाते हैं। वहां से वे कंबल, जैकेट, शॉल, याक के बाल और जूते जैसे सामान लेकर लौटते हैं। भारतीय व्यापारिक केंद्र गुंजी में स्थापित होता है, जहां भारतीय स्टेट बैंक की शाखा और कस्टम कार्यालय भी संचालित किए जाते हैं। यहां व्यापारियों को मुद्रा विनिमय की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। व्यापार बहाली से सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन की समस्या पर भी कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं और एक जून से व्यापार शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से भारत-चीन सीमा पर पारंपरिक व्यापारिक गतिविधियों को फिर से मजबूती मिलेगी।