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वन संरक्षण के लिए उत्तराखंड को केंद्र से मिला बड़ा संबल: कैम्पा के तहत 945 करोड़ की मदद,सीएम धामी ने जताया आभार

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देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध वन संपदा, जैव विविधता और अनमोल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए केंद्र सरकार से लगातार बड़ा सहयोग मिल रहा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर राष्ट्रीय प्राधिकरण कैम्पा के माध्यम से उत्तराखंड को उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता और आगामी कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की है।

उत्तराखंड की समृद्ध वन संपदा, हिमालयी पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी आर्थिक मदद उपलब्ध कराई है। राष्ट्रीय प्राधिकरण कैम्पा के माध्यम से प्रदेश में वन संरक्षण, पर्यावरणीय पुनर्स्थापना और जैव विविधता से जुड़े कार्यों के लिए पिछले तीन वर्षों में 945 करोड़ 69 लाख रुपये की लागत के कार्यों को मंजूरी दी गई है। केंद्र से लगातार मिल रहे इस सहयोग से उत्तराखंड में जंगलों के संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे पत्र में कैम्पा के तहत उत्तराखंड को उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र सरकार से वन संरक्षण के लिए सहयोग का अनुरोध किया गया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने प्रदेश के लिए स्वीकृत धनराशि और आगामी योजनाओं का विस्तृत ब्योरा साझा किया। पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 383 करोड़ 82 लाख रुपये, वर्ष 2024-25 में 335 करोड़ 37 लाख रुपये और वर्ष 2025-26 में 226 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि के कार्य अनुमोदित किए गए। इस तरह तीन वर्षों में कुल 945 करोड़ 69 लाख रुपये के कार्यों को मंजूरी मिली है। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 339 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना केंद्र को भेजी है। प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप प्रस्तावों की जांच और मूल्यांकन के बाद राष्ट्रीय प्राधिकरण कैम्पा ने इस कार्ययोजना में से अब तक 104 करोड़ 35 लाख रुपये की राशि मंजूर कर दी है।

वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में शामिल शेष प्रस्तावित कार्यों की स्वीकृति पर भी राष्ट्रीय प्राधिकरण की कार्यकारी समिति की 40वीं बैठक में विचार किया गया है। इससे प्रदेश में वन संरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। कैम्पा से मिलने वाली धनराशि का उपयोग वन संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय पुनर्स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाएगा। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए इन कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां के जंगल न केवल जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, बल्कि जलस्रोतों के संरक्षण, जलवायु संतुलन और स्थानीय पर्यावरण के लिए भी बेहद अहम हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पत्र में कहा है कि राष्ट्रीय प्राधिकरण कैम्पा उत्तराखंड सरकार को वार्षिक कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग देगा। केंद्र के इस आश्वासन से राज्य में पर्यावरण और वन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को और मजबूती मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट हिमालयी पारिस्थितिकी, वन संपदा और जैव विविधता का संरक्षण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन के प्रयासों को और गति मिलेगी। उत्तराखंड में बढ़ते पर्यावरणीय दबाव और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती के बीच वन संरक्षण के लिए उपलब्ध यह बड़ी वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के जंगलों और जैव विविधता को संरक्षित करने के साथ हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।