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उत्तराखंड: एक साल बाद भी किसानों तक नहीं पहुंची 'महक क्रांति नीति' की खुशबू,नियमावली न बनने से अटका लाभ

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देहरादून। देवभूमि में सगंध (एरोमा) खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'महक क्रांति नीति' फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। नीति की मंजूरी के एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक नियमावली तैयार न होने के कारण प्रदेश के हजारों किसान इसके वित्तीय अनुदान और सुविधाओं के लाभ से वंचित हैं।

उत्तराखंड में किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती के साथ सगंध एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महक क्रांति नीति फिलहाल कागजों में ही महकती नजर आ रही है। नीति को मंजूरी मिले करीब एक साल बीतने के बावजूद इसकी नियमावली तैयार नहीं हो सकी है। नियमावली के अभाव में किसानों को नीति में घोषित सब्सिडी, प्रशिक्षण, फसल बीमा और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश सरकार ने सितंबर 2025 में उत्तराखंड की पहली महक क्रांति नीति को मंजूरी दी थी। यह नीति आगामी 10 वर्षों के लिए लागू की जानी है। सरकार ने इसके पहले चरण में 22,750 हेक्टेयर क्षेत्र में 91 हजार किसानों को सगंध खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। नीति का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी खेती की ओर ले जाना है, जिसमें बेहतर बाजार और प्रसंस्करण के जरिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा किए जा सकें। नीति में सगंध पौधों की खेती करने वाले किसानों को आकर्षक सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। एक हेक्टेयर तक क्षेत्र में सगंध पौधे लगाने वाले किसानों को 80 प्रतिशत और इससे अधिक क्षेत्र में खेती करने वालों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दिए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अलावा नर्सरी तैयार करने, खेती के लिए अनुदान, किसानों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, फसल बीमा तथा उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी नीति में शामिल की गई हैं। सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सगंध वैली विकसित करने की योजना बनाई है। चमोली और अल्मोड़ा में 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में डेमस्क गुलाब वैली, चंपावत और नैनीताल में 5,200 हेक्टेयर में तेजपात वैली, पिथौरागढ़ में 5,150 हेक्टेयर में तिमूर वैली विकसित की जानी है। इसी तरह हरिद्वार और पौड़ी में 2,400 हेक्टेयर में लैमनग्रास वैली तथा ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मिंट वैली विकसित करने का प्रस्ताव है। इतनी बड़ी योजना और हजारों किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के बावजूद जमीनी स्तर पर इसकी शुरुआत अपेक्षित गति से नहीं हो पाई है। सबसे बड़ी अड़चन नियमावली का तैयार न होना बनी हुई है। जब तक नीति के क्रियान्वयन से जुड़े नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट नहीं होतीं, किसानों के लिए आवेदन, अनुदान और अन्य सुविधाओं का लाभ लेना मुश्किल बना हुआ है। हालांकि परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान संस्थान, सेलाकुई ने नर्सरी तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से किसानों तक नीति का लाभ पहुंचाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था तैयार करने की भी तैयारी है। प्रस्तावित पोर्टल के माध्यम से किसान नीति के तहत आवेदन कर सकेंगे और अनुदान भुगतान की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी। परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान संस्थान के निदेशक नृपेंद्र चौहान के अनुसार, महक क्रांति नीति की नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। नीति का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया जाएगा, जिसके माध्यम से आवेदन से लेकर अनुदान भुगतान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। महक क्रांति नीति से प्रदेश में सगंध खेती का दायरा बढ़ाने और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित करने की उम्मीद है। लेकिन नीति के बड़े लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए अब नियमावली को जल्द अंतिम रूप देना चुनौती है। किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब तक नीति को कागज से खेतों तक पहुंचाती है और ‘महक क्रांति’ वास्तव में उनके खेतों में खुशबू बिखेरती है।